Poetry

Remember your childhood and what you miss most.
Armano Ki Chori

परिवार के उपासक को, निज स्वार्थ ने ललकारा है,
अब वचनों का मोल नही, तू व्यापारी का मारा है,
धन जीवन पर है भारी, अश्रु बस जल की धारा है,
तू परिवारों से जीत गया, पर युद्ध स्वयम से हारा है ।
-जयेन्द्र​

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