नया परिप्रेक्ष्य : व्यापार नहीं है परिवार

व्यापारिकता यदि आप गहन निरीक्षण करें तो सफ़ल व्यक्तियों मे एक गुण अवश्य देखेगें, वह है “व्यापारिकता” (Commercialism). व्यापारिकता वह गुण है जो व्यक्ति को सोचा-समझ कर कार्य करने वाला, भावुक ना होने वाला, लाभ को अर्जित करने वाला एव विस्तारवादी बनाता है । ये सभी गुण व्यापार जगत मे अति सराहनीय है और होनाContinue reading “नया परिप्रेक्ष्य : व्यापार नहीं है परिवार”

स्वरोजगार और समाज

“स्टार्टअप“, ये चमत्कारी शब्द तो सुना ही होगा । सरकार से लेकर समाज तक सभी जगह ये शब्द चर्चा मे है । बड़े नगरों में तो ये शब्द सर्वाधिक प्रचलित है । जहाँ सरकार पूरी तरह प्रयासरत है, ऐसा प्रतीत होता है की समाज भी इसमे बराबर भगीदार है । परन्तु वास्तविक्ता इससे भिन्न हैContinue reading “स्वरोजगार और समाज”

आज का क्षत्रिय

हम सभी ने पौराणिक युद्ध कथाओं मे एक शब्द का उल्लेख बहुत देखा है, वह है “क्षत्रिय धर्म​” । इस शब्द की रचना के अनेक स्रोत मे से एक है “क्षत्र“, अर्थात वो जो रक्षा करे । भगवत गीता ( 18:43 ) शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम् | दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम् || अर्थ –Continue reading “आज का क्षत्रिय”

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